शनिवार, जून 6, 2026
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अनुच्छेद 316 – लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि | भारत का संविधान

316.सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि – (1) लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, यदि वह संघ आयोग या संयुक्त आयोग है तो, राष्ट्रपति द्वारा और, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल 1[***] द्वारा की जाएगी :

परंतु प्रत्येक लोक सेवा आयोग के सदस्यों में से यथाशक्य निकटतम आधे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं और उक्त दस वर्ष की अवधि की संगणना करने में इस संविधान के प्रारंभ से पहले की ऐसी अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने भारत में क्राउन के अधीन या किसी देशी राज्य की सरकार के अधीन पद धारण किया है।

1 [(1क) यदि आयोग के अध्‍यक्ष का पद रिक्त हो जाता है या यदि कोई ऐसा अध्‍यक्ष अनुपस्थिति के कारण या अन्य कारण से अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है तो, यथास्थिति, जब तक रिक्त पद पर खंड (1) के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति उस पद का कर्तव्य भार ग्रहण नहीं कर लेता है या जब तक अध्‍यक्ष अपने कर्तव्यों को फिर से नहीं संभाल लेता है तब तक आयोग के अन्य सदस्यों में से ऐसा एक सदस्य, जिसे संघ आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति और राज्य आयोग की दशा में उस राज्य का राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उन कर्तव्यों का पालन करेगा।]

(2) लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या संघ आयोग की दशा में पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक और राज्य आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में 2[बासठ वर्ष] की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा:

परंतु –

(क) लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य, संघ आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति को और राज्य आयोग की दशा में राज्य के राज्यपाल 2*** को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;

(ख) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को, अनुच्छेद 317 के खंड (1) या खंड (3) में उपबंधित रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा।

(3) कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

अनुच्छेद 316 की व्याख्या

यूपीएससी के सदस्यों नियुक्ति पदावधि से समबंधित उपबंध अनुच्छेद 316 में किए गए हैं । जो इस प्रकार हैं

अनुच्छेद 316 खंड(1) के अनुसार नियुक्ति

संघ और संयुक्त आयोग – राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त।

राज्य आयोग – राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त।

परन्तु के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों में आधे ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिन्होंने भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण किया हो ।


यह भी पढ़ें : अनुच्छेद 315 -संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग 


अनुच्छेद 316 खंड(1क) के अनुसार यदि अध्यक्ष अनुपस्थित है या पद रिक्त है, तब राष्ट्रपति (संघ एवं संयुक्त आयोग के लिए  या राज्यपाल (राज्य आयोग के लिए ) किसी अन्य सदस्य को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जा सकता है।

अनुच्छेद 316 खंड(2) के अनुसार आयोग के अध्यक्ष  व सदस्यों के कार्यकाल के संबंध में उपबंध करता है ।

संघ लोक सेवा आयोग के लिए : 6 वर्ष या 65 वर्ष तक (जो भी पहले हो)। 

राज्य/संयुक्त आयोग के लिए : 6 वर्ष या 62 वर्ष तक (जो भी पहले हो)। 

अनुच्छेद 316 खंड(3) आयोग के सदस्य का कार्यकाल पूर्ण हो जाने पर फिर से नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होगा । 

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