वारंट क्या है एवं वारंट प्रकार तथा इसका निष्पादन की प्रक्रिया | warrant kya hota hai evam warrant ke prakar va prakriya
दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 6 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को न्यायालय में बुलाने के लिए चार प्रकार की आदेशिकाएं बताई गई है, जिनका प्रयोग करके न्यायालय किसी भी में मामले में संबंधित व्यक्ति को अपने सामने हाजिर करवा सकता है, उन्हीं में से एक है वारंट अर्थात गिरफ्तारी का वारंट जिसके संबंध में धारा 70 से 81 तक में प्रावधान किया गया है।
वारंट का अर्थ क्या है ( what is meaning of warrant):
वारंट शब्द को दंड प्रक्रिया संहिता में कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है.
शाब्दिक अर्थ: “वारंट अर्थात अधिपत्र से तात्पर्य किसी व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई कार्य करने के लिए प्राधिकार प्रदान करना या सशक्त करना है।”
भारत सरकार की लीगल ग्लोसरी के अनुसार:
” वारंट कुछ प्राधिकारी द्वारा जारी रिट या आदेश, जो किसी अधिकारी को दंडादेश को निष्पादित करने या तलाशी, जब्ती या गिरफ्तारी करने के लिए सशक्त बनाता है। “
सरल शब्दों में कहें तो वारंट किसी प्राधिकारी के द्वारा जारी किया गया रिट या आदेश होता है,जो किसी प्राधिकारी को दंडादेश को निष्पादित करने, तलाशी, जब्ती या गिरफ्तारी करने के लिए सशक्त करता है।
इस प्रकार वारंट(अधिपत्र) शब्द की परिभाषा से यह बात क्लियर हो गई कि वारंट किसी व्यक्ति को कुछ करने का प्राधिकार देता है । इस प्रकार गिरफ्तारी का वारंट क्या है इसकी भी परिभाषा देख लेते हैं।
गिरफ्तारी वारंट क्या है? (What is arrest warrant?)
गिरफ्तारी के वारंट को संहिता में कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है गिरफ्तारी वारंट को इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है –
“गिरफ़्तारी वारंट से तात्पर्य न्यायलय के द्वार मुद्रांकित व हस्ताक्षर सहित लिखित रूप में पुलिस या किसी व्यक्ति को निर्दिष्ट ऐसे आदेश से है, जिसमें वर्णित व्यक्ति को गिरफ़्तार कर उसके समक्ष हाज़िर करें।”
दूसरे शब्दों में गिरफ़्तारी वारंट उसमें वर्णित व्यक्ति को पकड़ कर न्यायलय में लाने के लिए पुलिस या किसी व्यक्ति को न्यायलय द्वारा जारी आदेश है।
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गिरफ्तारी वारंट के प्रकार :
गिरफ्तारी वारंट दो प्रकार के होते हैं:
1 जमानतीय वारंट ( bailable warrant)
- अजमानती अर्थात गैर जमानती वारंट ( non bailable warrant)
1 जमानतीय वारंट ( bailable warrant):
जमानतीय वारंट न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जारी किया गया, ऐसा वारंट होता है जिसमें न्यायालय जारी करते समय, पृष्ठांकन द्वारा स्वाविवेकानुसार निर्देश दे सकता है कि यदि वह व्यक्ति न्यायालय के सामने विनिर्दिष्ट तिथि व समय पर अपने हाजिर होने के लिए पर्याप्त प्रतिभाओं सहित बंधपत्र निष्पादित कर देता है, तो वह पुलिस अधिकारी (जिसे वारंट निर्दिष्ट है) प्रतिभूति लेगा और उस व्यक्ति को अभिरक्षा से छोड़ देगा।
जब पुलिस अधिकारी द्वारा जमानतीय वारंट के अधीन प्रतिभूति ले ली जाती है, तो वह बंधपत्र को न्यायालय के पास भेजेगा।
जमानतीय वारंट में निम्नलिखित बातें पृष्टांकित की जाती है:
(i) प्रतिभूतियों की संख्या
(ii) वह रकम जिसके लिए प्रतिभा और गिरफ्तार होने वाला व्यक्ति आबध्द होते हैं।
(iii) न्यायालय के सामने हाजिर होने का समय
( धारा 71)
2) अजमानतीय अर्थात गैर जमानती वारंट ( non bailable warrant):
गैर जमानतीय वारंट, जमानतीय वारंट से भिन्न एक ऐसा वारंट होता है, जो न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जारी किया जाता है, जिसमें प्रतिभूति लेकर छोड़ने के संबंध में कोई भी निदेश नहीं होता है तथा उस पुलिस अधिकारी के लिए जिसको यह विनिर्दिष्ट होता है, उसमें वर्णित व्यक्ति को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष लाना आज्ञापक होता है।
वारंट किसे निर्दिष्ट होता है/ जारी किया जाता है (To whom the warrant is directed / issued)
सामान्यतः वारंट एक या अधिक पुलिस अधिकारी को ही निर्दिष्ट किया जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जहां की वारंट का निष्पादन तुरंत किया जाना हो और कोई पुलिस अधिकारी उपलब्ध ना हो, तब ऐसी स्थिति में वारंट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को निर्दिष्ट किया जा सकता है । ( धारा 72(1))
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट निम्नलिखित व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अपनी अधिकारिता के भीतर के किसी व्यक्ति को वारंट निर्दिष्ट कर सकता है :
- i) निकल भागे सिद्धदोष उद्घोषित अपराधी
- ii) अजमानतीय अपराध का अभियुक्त हो और गिरफ्तारी से बच रहा हो।
तब वह व्यक्ति ऐसे निर्दिष्ट वारंट को लिखित रूप में स्वीकार करेगा और अपने भारसाधन के किसी स्थान या भूमि में गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करेगा।
यदि वह व्यक्ति ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेता है,तब उसे वारंट के साथ निकटतम पुलिस अधिकारी के पास लेकर जाएगा और वारंट जमानतीय नहीं है, तो उसे मजिस्ट्रेट के सामने भिजवाएगा। ( धारा 73)
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वारंट का निष्पादन कौन कराएगा ? (who will execute the warrant?) :
जब किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का वारंट यह क्या अधिक पुलिस अधिकारी को या व्यक्तियों को निर्दिष्ट किया जाता है तब उनमें से कोई भी पुलिस अधिकारी के व्यक्ति यह सभी मिलकर वारंट को निष्पादित करा सकते हैं। ( धारा72(2))
यदि पुलिस अधिकारी (जिसे वारंट निर्दिष्ट है) किसी अन्य पुलिस अधिकारी का नाम वारंट पर पृष्ष्ठाकित करता है तब उस अन्य पुलिस अधिकारी द्वारा भी वारंट निष्पादित किया जा सकेगा। ( धारा 74)
वारंट कहां निष्पादित किया जाएगा?(where the warrant will be executed?)
किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का वारंट भारत के किसी भी स्थान पर निष्पादित किया जा सकता है।
इसका अर्थ यह है जब किसी व्यक्ति की लिए गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका हैं तब उसे संपूर्ण भारत में के किसी भी स्थान पर लागू किया जाएगा ।( धारा 77)
अधिकारिता के बाहर वारंट का निष्पादन:
धारा 77 वारंट को भारत के किसी भी स्थान पर निष्पादित करने का उपबंध करती है इसलिए संहिता की धारा 78 व 79 में वह रीति बताई गई है जिसके अनुसार वारंट, उसे जारी करने वाले न्यायालय के अधिकारिता से बाहर भी निष्पादित किया जा सकेगा।
पुलिस अधिकारी को निर्दिष्ट न होने की दशा में :
जब न्यायालय को गिरफ्तारी वारंट अपनी अधिकारिता के बाहर निष्पादित कराना होता है, तब वारंट को डाक द्वारा या अन्य साधन से उसी स्थान में अधिकारिता रखने वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त को भेजेगा, जहांकि वारंट निष्पादित किया जाना है ।
इस तरह वारंट प्राप्त होने पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त अपने नाम का पृष्ठांकन करेगा और वारंट का निष्पादन के लिए विहित रीति से उसका निष्पादन कराएगा।
न्यायालय वारंट के साथ जमानत मंजूर करने या ना करने संबंधित जानकारी का सार दस्तावेज सहित भेजेगा। (धारा 78)
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पुलिस अधिकारी को निर्दिष्ट वारंट:
जब गिरफ्तारी वारंट न्यायालय की अधिकारिता के भीतर के पुलिस अधिकारी को निर्दिष्ट है,लेकिन उसका निष्पादन न्यायालय की अधिकारिता के बाहर किया जाना है। तब पुलिस अधिकारी उस वारंट को उस स्थान में अधिकारिता रखने वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी ( जो कि भारसाधक अधिकारी की रैंक से नीचे का ना हो) के पास लेकर जाएगा, जहां की वारंट निष्पादित किया जाना है।
पुलिस अधिकारी द्वारा वारंट इस प्रकार लाए जाने पर। वह मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी (जिसकी स्थानीय अधिकारिता में निष्पादन होना है) उस पर अपना नाम पृष्ठांकित करेगा और ऐसा पृष्ठांकन उस पुलिस अधिकारी के लिए (जिसे वारंट निर्दिष्ट किया है) निष्पादन के लिए पर्याप्त प्राधिकार होगा।
लेकिन उस पुलिस अधिकारी को (जिसे वारंट निर्दिष्ट है) यह लगता है कि पृष्ठांकन कराने में समय लगेगा और वारंट का निष्पादन नहीं हो पाएगा, तब वह बिना पृष्ठांकन के ही अपनी अधिकारिता के बाहर निष्पादन करा सकेगा। (धारा 79)
अधिकारिता के परे निष्पादन होने के बाद प्रक्रिया :
जब किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी, ऐसे वारंट के निष्पादन में हुई है जो धारा 78 व 79 के उपबंधों के अधीन अधिकारिता से बाहर हुई हो तथा जो ऐसे वारंट जारी करने वाले न्यायालय के जिले के बाहर है।
ऐसी दशा में गिरफ्तार व्यक्ति को उस जिले के कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त के पास लेकर जाया जाएगा।
लेकिन निम्न अपवाद दशाओं को छोड़कर
(I) जब वारंट जारी करने वाला न्यायालय 30 किलोमीटर के भीतर हो या
(II) उक्त प्राधिकारी व न्यायालय में से न्यायालय अधिक निकट
(III) जमानतीय वारंट हो और प्रतिभूति ले ली हो।
(धारा 80)
जब गिरफ्तार व्यक्ति मुक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त के सामने लाया जाता है तब सबसे पहले यह सुनिश्चित करेगा कि गिरफ्तार व्यक्ति वही व्यक्ति है जो वारंट में वर्णित है और अभिरक्षा में न्यायालय को भेजने का निर्देश देगा।
लेकिन यदि अपराध जमानतीय है, और गिरफ्तार व्यक्ति जमानत देने को तैयार और राजी है, तो उससे जमानत और प्रतिभूति लेकर छोड़ देगा और बंधपत्र को, वारंट जारी करने वाले न्यायालय को भेज देगा।
लेकिन यदि अपराध और अजमानतीय है, तब उस जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय जमानत संबंधी प्रावधानों के अधीन वारंट के साथ की जानकारी व दस्तावेजों पर विचार करने के पश्चात उसे छोड़ देगा।
( धारा 81)
वारंट के निष्पादन के बाद की प्रक्रिया जब भारत के अधीन किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाता है उसके बाद की प्रक्रिया क्या होती है इसे दो प्रकार से समझा जा सकता है क्योंकि इस प्रकार है
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अधिकारिता के अधीन वारंट का निष्पादन हो तब :
जब किसी व्यक्ति को वारंट के अधीन गिरफ्तार किया जाता है और ऐसी गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाले न्यायालय की अधिकारिता के भीतर की गई थी। तब गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना उसे विधि के अनुसार अपेक्षित न्यायालय के पास ले जाएगा। ऐसा विलंब के किसी भी दशा में यात्रा के आवश्यक समय को छोड़कर 24 घंटे से ज्यादा का नहीं होगा। ( धारा 76)
नोट : अधिकारिता के बाहर वारंट का निष्पादन होने पर भी गिरफ्तार व्यक्ति को यात्रा के आवश्यक समय को छोड़कर 24 घंटे के भीतर संबधित प्राधिकारी या न्यायालय के समक्ष पेश करना होगा ।
निष्कर्ष स्वरूप कहा जा सकता है वारंट न्यायालय मे किसी व्यक्ति की हाजरी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को निर्दिष्ट एक आदेशिका होती है , जिसे भारत के भीतर किसी भी स्थान पर निष्पादित किया जा सकता है और उसमे वर्णित व्यक्ति को गिरफ्तार का न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है , जिससे न्यायिक प्रक्रिया का सुचारु रूप से संचालन हो सके और पीड़ित व्यक्ति को जल्द से जल्द न्याय मिल सके ।
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लेख पर आधारित प्रश्न : वारंट से आप क्या समझते हैं ? यह कितने प्रकार के होते हैं ?
Q.गिरफ़्तारी वारंट क्या है ? इसके संबंध मे दंड प्रक्रिया साहिंता मे क्या प्रावधान किए गए हैं ?