शुक्रवार, फ़रवरी 28, 2025
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mahila aarakshan bill 2023 || लोकसभा एवं राज्य विधान सभाओं में महिला आरक्षण बिल 2023 |महिला आरक्षण बिल 2023

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों मे एक और अध्याय जुडने जा रहा है । एक ओर महिलायें हर क्षेत्र में सफलता का परचम लेहरा रही है, वहीं “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” (“संविधान का 128 वां संशोधन विधेयक 2023” ) अब देश की महिलाओं के लिए विधायी क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की दशा में एक ऐतिहासिक कदम  है।

महिला आरक्षण बिल 2023 क्या है ?

दरअसल संसद के विशेष सत्र में लोकसभा और राज्य की विधान सभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का उपबंध करने वाला विधेयक एक लंबे अरसे के बाद लोकसभा व राज्यसभा से पारित हो गया है। इसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” नाम दिया गया, जिसके अनुसार अब महिलाओं के लिए लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के लिए होने वाले चुनावों मे 33 % सीटें महिलाओं के लिए होंगी। यह संशोधन भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में, विशेषकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने जा रहा है। आइए इस अभूतपूर्व संशोधन के प्रमुख प्रावधानों और निहितार्थों पर गौर करें।

महिला आरक्षण बिल 2023 के प्रमुख प्रावधान :

संविधान का (128वां संशोधन) विधेयक 2023 के माध्यम से लोकसभा और राज्य की विधान सभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए । संसद ने अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान मे संशोधन करने की अपनी शक्ति को प्रयोग मे लाते हुए । लोकसभा मे यह विधेयक पेश किया जिसके प्रमुख उपबंध निम्न है –

पहला प्रावधान: अनुच्छेद 239कक  का संशोधन:

128वें संविधान संशोधन अधिनियम का पहला प्रावधान अनुच्छेद 239कक, विशेष रूप से खंड 2 के उपखंड (क ) (ख) के बाद नए उपखंड (कख), (खख)व (खग) जोड़ता है। अनुच्छेद 239एए दिल्ली के लिए विशेष प्रावधानों से संबंधित है, जिसकी अपनी विधान सभा है। संशोधन नए उपखंड (कख), (खख) में ऐसे प्रावधान पेश करता है,  जो दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधानसभा में महिला आरक्षण को अनिवार्य बनाते हैं। 

उपखंड (कख) के अनुसार:दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित किए जाएंगे । 

उपखंड (खख) के अनुसार: दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधानसभा में अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए एक तिहाई स्थान आरक्षित किए जाएंगे । 

उपखंड (खग) के अनुसार:दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधानसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वरा भरे जाने वाले कुल सीटों मे से (अनुसूचित जाति की महिलाओं को शामिल करते हुए ) एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिएआरक्षित किए जाएंगे। 

दूसरा प्रावधान : अनुच्छेद 330A लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण:

 दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान एक नया अनुच्छेद 330क को जोड़ता है। इस अनुच्छेद का उद्देश्य भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में लैंगिक असंतुलन को संतुलित करना है। इसमें यह प्रावधान है कि लोकसभा की कुल सीटों में से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह महत्वपूर्ण परिवर्तन यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है कि देश की सर्वोच्च विधायी संस्था में महिलाओं की मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति हो।

तीसरा प्रावधान: अनुच्छेद 332A  विधान सभा मे महिलाओं को आरक्षण:

तीसरा महत्वपूर्ण प्रावधान भारतीय संविधान में अनुच्छेद 332A जोड़ता है। यह अनुच्छेद भारत के प्रत्येक राज्य की विधानसभाओं में महिला आरक्षण के लिए उपबंध करता है। राष्ट्रीय स्तर पर अपने समकक्ष, अनुच्छेद 330क की तरह, यह प्रावधान अनिवार्य करता है कि प्रत्येक राज्य विधानसभा में कुल सीटों में से एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह कदम महिलाओं को राज्य-स्तरीय नीतियों और शासन को आयाम देने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है।

चौथा प्रावधान : अनुच्छेद 334A आरक्षण का लागू होना: 

 128वें संविधान संशोधन विधेयक का अंतिम प्रावधान अनुच्छेद 334ए है, जो आरक्षण के प्रभाव और कार्यान्वयन को संबोधित करता है। यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि महिलाओं के लिए लोकसभा, राज्य की विधान सभा और दिल्ली की विधान सभा, में आरक्षण से संबंधित लाभ 128वें संविधान संशोधन विधेयक 2023 के लागू हो जाने के बाद पहली बार जनगणना के आँकड़े प्रकाशित हो जाने के बाद परिसीमन का कार्य किया जाएगा । सीटों का परिसीमन हो जाने के बाद उक्त प्रवधान लागू होंगे । सामान्य शब्दों मे कहा जाए तो ये महिला आरक्षण लगभग 2026 के बाद होने वाले चुनावों में लागू हो सकेगा । साथ ही यह प्रावधान 128वें संविधान संशोधन विधेयक 2023 के लागू हो जाने के बाद से 15 वर्ष पूरे हो जाने के बाद लागू नहीं होंगे । इसके खंड 2 मे कहा गया है कि अनुच्छेद 239AA , 330A,332A के अधीन रहते हुए लोकसभा, राज्य की विधान सभा और दिल्ली की विधान सभा, में आरक्षण संसद विधि द्वारा तय करे तब जारी रहेंगे। 
 

निष्कर्ष :

128वां संविधान संशोधन विधेयक2023 राजनीतिक संस्थानों में लैंगिक समानता हासिल करने के लिए भारत के समर्पण की एक शानदार पुष्टि है। यह अधिक समावेशी और न्यायसंगत लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त करता है। यह ऐतिहासिक संशोधन न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देता है, बल्कि शासन में उनके द्वारा लाए गए अद्वितीय दृष्टिकोण और अनुभवों को भी स्वीकार करता है। यह यह सुनिश्चित करने में दुनिया के लिए एक उदाहरण स्थापित करता है, कि देश के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की भी समान हिस्सेदारी है।जैसे ही यह संशोधन प्रभावी होता है, यह भारत के लिए प्रगति का जश्न मनाने और एक ऐसे भविष्य की आशा करने का क्षण होगा, जहां महिलाएं देश के विकास और शासन में और भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 

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