अनुच्छेद 2 – नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना :– संसद्, विधि द्वारा, ऐसे निबंधनो और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी|
व्याख्या Explanation
भारत के संविधान के अनुच्छेद 2 के अनुसार, संसद को नए राज्यों की स्थापना के लिए कोई भी आवश्यक कानून बनाने का अधिकार है। इसका अर्थ है कि संसद को भारत संघ मे नए राज्यों क्षत्रों के प्रवेश और स्थापना का अधिकार प्राप्त है।
उदाहरण के लिए: भारत संघ मे गोवा को 1961 मे शामिल किया गया। यह संसद द्वारा विधि बनाकर ही किया गया ।
नए राज्यों की स्थापना के लिए संसद को अधिकार देने के पीछे कई कारण हैं। इनमें शामिल हैं:
- क्षेत्रीय और भाषाई समानता को बढ़ावा देना: नए राज्यों की स्थापना से क्षेत्रीय और भाषाई समानता को बढ़ावा मिल सकता है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभाजन से तेलुगु भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य प्राप्त हुआ।
- प्रशासनिक कुशलता में सुधार करना: नए राज्यों की स्थापना से प्रशासनिक कुशलता में सुधार हो सकता है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभाजन से दोनों राज्यों को अधिक कुशलता से प्रशासित किया जा सकता है।
- आर्थिक विकास को बढ़ावा देना: नए राज्यों की स्थापना से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना के गठन से तेलंगाना क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- लोकतंत्र को मजबूत करना: नए राज्यों की स्थापना से लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना के गठन से तेलंगाना क्षेत्र में लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।