सीआरपीसी की धारा 154
(What is Section 154 of crpc)
यह धारा पुलिस अधिकारी द्वारा किसी अपराध की एफ आई आर लिखित करने की प्रक्रिया को विहित करती है।
(what is FIR)
जब कोई व्यक्ति
संज्ञेय अपराध करने की सूचना पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को देता है तब वह धारा 154 की प्रक्रिया से उसे लेखबद्ध करता है तो वह F.I.R. कहलाती है जिसे हम हिंदी में प्रथम सूचना प्रतिवेदन या प्राथमिकी कहते है।
धारा 154 सीआरपीसी
Section 154 of crpc
संज्ञेय मामलो में इतिला
— (1) संज्ञेय अपराध के किए जानेसे संबंधित प्रत्येक इत्तिला, यदि पुिलस थाने के भारसाधक अधिकारी को मौखिक दी गई है तो उसके उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्घ कर ली जाएगी और इत्तिला देनेवाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तिला पर, चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या पूर्वोक्त रूप मे लेखबद्घ की गई हो, उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे जो उसे दे और उसका सार ऐसी पुस्तक में जो उस आधिकारी द्वारा ऐसे प्रारूप में रखी जाएगी जिसे राज्य सरकार इस निमित विहित करे, प्रविष्ट किया जाएगा ।
इस खंड में किसी अपराध की सूचना पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी को मौखिक दी जाती है तो उसके द्वारा लिखी जाती है। और देने वाले को पड़कर सुनाई जाती है।
परंतु यदि किसी स्त्री के द्वारा जिसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता1860 की धारा 326क धारा 326ब धारा 354 धारा 354क धारा 354ख धारा 354ग धारा 354घ धारा 376 धारा 376क धारा376कख, धारा376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक धारा 376घख, धारा376़डं या धारा 509 के अधीन किसी अपराध के किए या किए जाने के प्रयत्न किए जाने का अभिकथन किया गया है, कोई इत्तिला दी जाती है, तो ऐसी इत्तिला किसी महिला पुलिस अधिकारी या किसी महिला अधिकारी द्वारा अभिलिखित की जाएगी
यह परंतु दंड विधि संशोधन 2013 के द्वारा जोड़ा गया तथा जिसमें दंड विधि संशोधन अधिनियम 2018 के माध्यम से संशोधन भी किया गया।
जब इस परंतु में बताई गई धाराओं में महिला के विरूद्ध कोई अपराध किया जाता है , तब उसकी रिपोर्ट महिला पुलिस अधिकारी द्वारा लिखी जाएगी या महिला पुलिस अधिकारी नहीं है तब किसी महिला अधिकारी द्वारा लिखी जाएगी।
परन्त यह और कि:
(क) यदि वह व्यक्तिजिसके विरुद्ध भारतीयत दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 354, धारा 354क, धारा 354ख, धारा
354ग, धारा 354घ, धारा 376, धारा 376क, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376ङ या धारा 509 के अधीन िकसी
अपराध केकिए जाने का या किए जाने का प्रयत्न किए जाने का अिभकथन किया गया है, अस्थायी या स्थायी रूप से मानिसक या शारीिरक रूप से निशक्त है तो ऐसी इत्तिला किसी पुलिस आधिकारी द्वारा उस व्यक्ति के, जो ऐसे अपराध की रिपोर्ट करने की ईप्सा करता है, निवास स्थान पर या उस वव्यक्ति केविकल्प के किसी सुगम स्थान पर, यथास्थित,किसी दिविभाषिया या किसी विशेष प्रबोधक
की उपस्थित में अभिलिखित की जाएगी ;
(ख) ऐसी इत्तिला के अिभलेखन की वीडियो फिल्म तैयार की जाएगी ;
(ग) पुिलस अधिकारी धारा 164 की उपधारा (5क) के खंड (क) के अधीन किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा उस व्यक्ति का कथन यथासंभव शीघ्र अिभिलिखत कराएगा।]
(2) उपधारा (1) केअधीन अभिलिखित इत्तिला की प्रतिलिपि इत्तिला देनेवालेको तत्काल नि:शुल्क दी जाएगी ।
इस उपधारा के अनुसार FIR लिखाने वाले को FIR की मुफ्त प्रति दी जाती है।
(3) कोई व्यक्ति जो किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के उपधारा (1) यथाविनिर्दिष्ट इत्तिला को अभिलिखित करने से इंकार करने से व्यथित है, ऐसी इत्तिला का सार लिखित रूप में और डाक द्वारा संबद्ध पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है जो, यदि उसका यह
समाधान हो जाता है कि ऐसी इत्तिला से किसी संज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट होता है तो, या तो स्वयं मामले का अन्वेषण करेगा या अपने अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस संहिता द्वारा उपबंधित रीति से अन्वेषण किए जाने का निदेश देगा और उस अधिकर
को उस अपराध के संबंध में पुलिस थाने के भारसाधक अधिकर की सभी शक्तियां होंगी।
इस उपधारा के अनुसार जब उपधारा 1 के अधीन पुलिस थाने का भार साधक अधिकारी FIR लिखने से मना करता है तब उस क्षेत्र के एसपी को डाक के माध्यम से भेज सकते है। तब एसपी उसे लगता है कि मामला संज्ञेय है ,तो वह(SP) इन्वेस्टिगेशन के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारी को निदेेश देगा और तब ऐसा अधिकर इन्वेस्टिगेशन करेगा।
इस तरह से सीआरपीसी की धारा 154 f.i.r. लिखने की प्रक्रिया को बताती है।