section 16 contract act| Dhara 16 samvida adhiniyam | धारा 16 संविदा अधिनियम
धारा 16 “असम्यक् असर” की परिभाषा – (1) संविदा असम्यक् असर द्वारा उत्प्रेरित कही जाती है जहां कि पक्षकारों के बीच विद्यमान संबंध ऐसे हैं कि उनमें से एक पक्षकार दूसरे पक्षकार की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में है और उस स्थिति का उपयोग उस दूसरे पक्षकार से अऋजु फायदा अभिप्राप्त करने के लिए करता है।
(2) विशिष्टतया और पूर्ववर्ती सिद्धांत की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि कोई व्यक्ति किसी अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में है समझा जाता है जब कि वह
(क) उस अन्य पर वास्तविक या दृश्यमान प्राधिकार रखता है, या उस अन्य के साथ वैश्वासिक संबंध की स्थिति में है; अथवा
(ख) ऐसे व्यक्ति के साथ संविदा करता है जिसकी मानसिक सामर्थ्य पर आयु, रुग्णता या मानसिक या शारीरिक कष्ट के कारण अस्थायी या स्थायी रूप से प्रभाव पड़ा है।
(3) जहां कि कोई व्यक्ति, जो किसी अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में हो, उसके साथ संविदा नियम करता है, और वह संव्यवहार देखने से ही या दिए गए साक्ष्य के आधार पर लोकात्माविरुद्ध प्रतीत होता है वहां यह साबित करने का भार कि ऐसी संविदा असम्यक् असर से उत्प्रेरित नहीं की गई थी उस व्यक्ति पर होगा जो उस अन्य की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में था। इस उपधारा की कोई भी बात भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 111 के उपबंधों पर प्रभाव नहीं डालेगी।
दृष्टांत
(क) क, जिसने अपने पुत्र रख को उसकी अप्राप्तवयता के दौरान में धन उधार दिया था, ख के प्राप्तवय होने पर अपने पैत्रिक असर के – दुरुपयोग द्वारा उससे उस उधार धन की बाबत शोध्य राशि से अधिक रकम के लिए एक बन्धपत्र अभिप्राप्त कर लेता है। क असम्यक् असर को प्रयोग करता है।
(ख) रोग या आयु से क्षीण हुए मनुष्य क पर ख का, जो असर उसके चिकित्सीय परिचारक के नाते है, उस असर से ख को उसकी वृत्तिक सेवाओं के लिए एक अयुक्तियुक्त राशि देने का करार करने के लिए क उत्प्रेरित किया जाता है। ख असम्यक् असर का प्रयोग करता है।
(ग) क अपने ग्राम के साहूकार ख का ऋणी होते हुए एक नई संविदा करके ऐसे निबंधनों पर धन उधार लेता है जो लोकात्माविरुद्ध प्रतीत होते हैं। यह साबित करने का भार कि संविदा असम्यक् असर से उत्प्रेरित नहीं की गई थी ख पर है।
(घ) क एक बैंककार से उधार के लिए ऐसे समय में आवेदन करता है। जब धन के बाजार में तंगी है। बैंककार ब्याज की अप्रायिक ऊंची दर पर देने के सिवाय उधार देने से इन्कार कर देता है। क उन निबंधनों पर उधार प्रतिगृहीत करता है। यह संव्यवहार कारबार के मामूली अनुक्रम में हुआ है, और यह संविदा असम्यक् असर से उत्प्रेरित नहीं है।
व्याख्या Explanation
धारा 14 | धारा 13 | धारा 12 | धारा 11 | धारा 10 | धारा 9 | धार 8 | धारा 7 | धारा 5 | धारा 3 | धारा 2 | धारा 1 धार 6 | धारा 4 | संविदा विधि की उद्देशिका |