शनिवार, मार्च 1, 2025
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय के बारे मे [Supreme Court of india in Hindi

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के बारे मे [Supreme Court of india in Hindi

आज  हम जानेगे supreme court of India के बारे  में कुछ Intresting fact  जो आमतौर पर लोगों को नहीं पता होते है, यदि आप भारतीय नागरिक हैं तब आपको अपने देश के सबसे विश्वसनीय अंग के बारे में पता होना ही चाहिए और यदि आप specially competitive exam की तैयारी कर रहे हैं, तब तो आपके लिए यह और भी महत्त्वपूर्ण हो जाते है,आखिर हमारे देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है ।

 Fact No. 21

 भारतीय इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 1773 ई.  के रेग्यूवेटिंग के तहत 1774 में  फोर्ट विलियम कलकत्ता में की गई थी। इस न्यायालय का गठन मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश से मिलकर होता था। इसके पहले मुख्य न्यायाधीश ( chief Justie ) सर एलिजाह थे।

 

 Fact no.20 

1अक्टूबर 1937 को भारत शासन अधिनियम 1935 के अधीन भारत में अपीलीय और सलाहाकारी अधिकारिता वाले एक संघीय न्यायालय अर्थात Federal Court ( फेडरल कोर्ट ) की स्थापना की गई थी । इससे सविधत संबंधित अंतिम शक्ति लंदन स्थित प्रीवि कौंसिल को प्राप्त थी। Federal कोर्ट का गठन मुख्य न्यायाधीश व दो अन्य न्यायाधीशों से मिलकर होता था । संघीय न्यायालय ( federal court ) के पहले चीफ जस्टिस सर मौरिस ग्वायर थे ।

  Fact no.19 

Federal court( संघीय न्यायालय) को ही 1937 से 28 जनवरी1950तक भारत का  सर्वोच्च न्यायालय यानी Superme Court होने का गौरव प्राप्त था । जो  दिल्ली में संसद भवन के चैम्बर ऑफ प्रिंसेस में अपनी बैठक करता था ।

 fact no . 18 

 भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत का सर्वोच्च न्यायालय अर्थात Supeme court of India न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति सहित शीर्ष अपीलीय एवं संवैधानिक न्यायिक अदालत के रूप में अस्तित्व आया।

 fact no . 17 

भारत के संप्रभु , लोकतंत्रात्मक, गणतंत्र होने के दो दिन बाद यानी 28 जनवरी 1950 को दिल्ली में स्थित संसद भवन के चैम्बर ऑफ प्रिंसेस में Supreme Court of India का inauguration( उद्घाटन) किया गया और इसी दिन वर्तमान सुप्रीम कोर्ट अस्तित्व में आया और अपना कार्य करना आरंभ कर दिया ।

 Faut no . 16

भारत के पहले Chite Justice of India के रुप में जस्टिस हीरालाल जे . कानिया जी को चुना गया तथा इनके साथ ही 7 अन्य न्यायाधीशों को भी चुना गया था ।

Fact no.15

 संविधान के प्रारंभ के समय पर Article 124 के अनुसार Supreme court of India का गठन मुख्य न्यायमूर्ति तथा 7 अन्य न्यायाधीशों से मिलकर होता था। लेकिन इस संख्या को दिन व दिन बढ़ते मामलों के निपटारे व शीघ्र न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से  संसद द्वार समय- समय पर इसे बढ़ाया जाता रहा है, वर्तमान में मुख्य न्यायमूर्ति तथा 33 अन्य न्यायाधीशों मिलकर सर्वोच्च न्यायालय का गठन होता है ।

 Fact no.14 

Superme Court of india की Building की आधारशिला 29 अक्टूबर 1954 को – भारत प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी द्वारा रखी गई । 4 अगस्त 1958 को Supreme court के वर्तमान में तिलक मार्ग दिल्ली स्थित भवन का उद्‌घाटन किया गया, तब तक Supeme court अपनी बैठक चैम्बर ऑफ प्रिंसेस में करता था ।

Faut no 13.

Supreme count की Building के वास्तुकार गणेश भीखाजी देवलालीकार थे, जिन्होंने इण्डो – ब्रिटश स्थापत्य शैली में Supeime Court की बिल्डिंग  को डिजायन किया ।

 Fact no.12 

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सर्वोच्च न्यायालय की बिल्डिंग स्वयं न्याय की तराजू [scale of justice) के जोड़े के साथ संतुलित रूप में है,जो स्केल ऑफ जस्टिस यानी कि न्याय के तराजू की छवि को दर्शित करता है।

Fact no.11 

सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग में तीन हिस्से हैं यानी कि विंग्स है जिसमें सेंट्रल विंग्स में मुख्य न्यायमूर्ति के कोर्टरूम के साथ दो अन्य कोर्टरूम है सैंट्रल विंग्स तराजू के केंद्रीय भीम को दर्शाता है जिस पर तराजू लटकी होती है।

वहीं लेफ्ट विंग में कोर्ट के ऑफिस आदि हैं तथा राइट विंग में बार रूम, अटॉर्नी जनरल एवं लॉ ऑफिसर के ऑफिस तथा लाइब्रेरी है।

इन दोनों विंग्स का 1979 में एक तथा 1994 में दूसरी विंग्स का विस्तार किया गया।

Fact no. 10

सुप्रीम कोर्ट के लोन परिसर में 20 फरवरी 1980 को कांस्य से निर्मित एक काले रंग की 210 सेंटीमीटर ऊंची एक मूर्ति स्थापित की गई, जिसमें एक महिला बच्चे को पकड़े है और बच्चे के हाथ में एक खुली किताब है। इस मूर्ति के बारे में आश्चर्यजनक बात यह है , कि महिला भारत माता का प्रतिनिधित्व करती है, और बच्चे के रूप में भारत के युवा गणराज्य को दर्शित किया गया है, अर्थात भारत माता आश्रय दे रही है।

और वहीं बच्चे द्वारा पकड़ी गई खुली किताब देश के कानूनों को दर्शित करती है और किताब का संतुलन सभी के लिए समान न्याय की व्यवस्था को दर्शाता है। इस मूर्ति को चिंतामणि कार द्वारा डिजाइन किया गया है।

Fact no.9

 सुप्रीम कोर्ट में अभी तक कोई भी महिला चीफ जस्टिस नहीं बन पाई है, हालांकि 1959 में मीरा साहिब फातिमा बीबी सुप्रीम कोर्ट की पहली न्यायाधीश बनी थी, जो एशिया के किसी भी सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वाली पहली महिला न्यायाधीश थी।

Fact no.8 

संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत केवल सुप्रीम कोर्ट को ही है शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी मामले में पूर्ण न्याय अर्थात Complete Justice करने के उद्देश्य से कोई भी डिक्री पारित कर सकता है या आदेश कर सकता है,जिसे  वह लागू भी करवा सकता है।

 

Fact no.7

अनुच्छेद 143 के अधीन सलाह या संविधान के निर्वाचन संबंधी प्रश्नों की सुनवाई कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ के द्वारा की जाती है और सुप्रीम कोर्ट अपना हर एक जजमेंट open Court अर्थात खुले न्यायालय में ही सुनाता है।

Fact no 6

अनुच्छेद 143 के अंतर्गत व्यापक महत्व के किसी विधि या तथ्य के किसी भी प्रश्न पर राष्ट्रपति को राय देने की शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट को ही प्राप्त है, भारत में स्थित अन्य किसी भी न्यायालय को इस संबंध में कोई भी शक्ति प्राप्त नहीं है।

Fact no.5

सुप्रीम कोर्ट की इतिहास में अब तक सबसे लंबी सुनवाई लगातार 68 दिनों तक केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में हुई थी, वहीं दूसरी सबसे लंबी सुनवाई अयोध्या मामले में लगातार 40 दिनों तक हुई। इन दोनों ही मामलों में सुप्रीम कोर्ट में लगातार चलने वाली सुनवाईयों में अभी तक सबसे लंबी हैं।

Fact no.4

प्रारंभिक वर्षों में सुप्रीम कोर्ट 1 वर्ष में केवल 28 दिन ही सुनवाई करता था। जिसका समय सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक होता था और दोपहर में 2 से 4 बजे तक होता था। वर्तमान में अब सुप्रीम कोर्ट 1 वर्ष में 190 दिन सुनवाई अर्थात बैठक करता है।

 

Fact no.3

 सुप्रीम कोर्ट के लोगों यानी सील में धर्म चक्र को अपनाया गया है, जो अशोक चक्र तथा सारनाथ स्तंभ से लिए गए चार सिंह से मिलकर बनता है।

Fact no.2 

यूं तो सुप्रीम कोर्ट में हर कार्रवाई इंग्लिश में होती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने मोटो अर्थात ध्येय वाक्य के रूप में संस्कृत भाषा के “यतो धर्मस्ततो जया” को अपनाया है जिसका अर्थ होता है “मैं केवल सत्य कायम रखता हूं” या “विजय सदा धर्म के पक्ष में होती है।”

संस्कृत का यह वाक्य महाभारत से लिया गया है। जिसमें एक श्लोक “यत: यता कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जय:” अतः कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन युधिष्ठिर की अकर्मण्यता को दूर करते हुए कहते हैं, कि विजय सदा धर्म के पक्ष में होती है और जहां श्री कृष्ण हैं, वहां धर्म है।

Fact no.1

 सुप्रीम कोर्ट रात को भी सुनवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक 5 से 6 बार ऐसा किया गया है ।जब सुप्रीम कोर्ट ने मामालों को रात में सुना है। अभी हाल ही में अंतिम बार मार्च 2020 में निर्भया मामले में दोषी द्वारा फांसी को रोकने के लिए लगाई गई याचिका पर रात में सुनवाई की गई थी जिसे खारिज कर दिया गया और उसके कुछ घंटे बाद ही सभी दोषियों को फांसी पर लटकाया गया हालांकि सुप्रीम कोर्ट ऐसा रेयर ही करता है।

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