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समन क्या होता है किस प्रकार से तामील कराया जाता है?
What is summon and how to made service of summon
समन summon
समन क्या होता है :
समन का प्रारूप कैसा होता है ?(format of summon)
समन कैसे तामील होता हैं? (Service of summon)
1. व्यक्तिगत तामील:-
समन तामील की पहली रीति होती है । इसमे समन किये गए व्यक्ति को समन कि दो प्रतियों में से एक प्रति उसे को देकर औऱ समन की दूसरी प्रति के पिछले भाग पर उसके ((जिस पर समन की तामील की जानी है ) रसीद हस्ताक्षर लेकर व्यक्तिक रूप से तामील की जा सकेगी ।(धारा62)
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उदाहरण:
एक व्यक्ति, “रलुआ कुमावर “, के विरुद्ध एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय द्वारा रलुआ कुमावर के नाम से न्यायालय में हाजिर होने के लिए समन निकाला जाता है। इस समन को तामील करने के लिए, एक अधिकारी Y, “रलुआ कुमावर ” के पास जाता है, और उसे समन की एक प्रति सौंपता है, और दूसरी प्रति पर उसके रसीद हस्ताक्षर करवा लेता है। यह व्यक्तिगत रूप से समन तामील करने की प्रक्रिया कहलाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि समन सही व्यक्ति तक पहुँच गया है और उसे मामले की जानकारी हो गई है ।
2. निगमित तामील:-
जब समन किसी निगम पर तामील किया जाना हो, तब समन उस निगम के सचिव ,स्थनीय प्रबंधक ,या अन्य प्रधिकारी पर तामील किया जा सकेगा । इसके साथ ही भारत मे निगम के मुख्य अधिकारी के पते पर रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भी समन तामील किया जा सकेगा। समन तामील के इस ढ़ंग को निगमित तामील कहते है।(धारा63)
उदाहरण –
मान लीजिए कि एक कंपनी, “वेब-सन इंडस्ट्रीज”, पर एक मुकदमा संस्थित किया जाता है। तब न्यायालय द्वारा जारी समन को कंपनी के सचिव को सौंप दिया जाता है और साथ ही कंपनी के मुख्य कार्यालय के पते पर रजिस्ट्रीकृत डाक के माध्यम से भी भेजा जाता है। यह प्रक्रिया निगमित तामील कहलाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कंपनी को विधिक कार्यवाही की जानकारी सही ढंग प्राप्त हो सके।
3. विकसित या विस्तृत तामील
विकसित तामील तब की जाती है, जब समनित व्यक्ति उचित सतर्कता बरतने पर मिल नहीं पता है । तब समन की तामील उसके साथ रहने वाले उसके परिवार के वयस्क पुरुष सदस्य पर की जाती है। समन तामील का यह ढ़ंग को विकसित तामील कहलाता है। धारा (64)
उदाहरण “अजय सिंह” को न्यायालय द्वारा समन भेजा गया है, लेकिन अधिकारी द्वारा उचित प्रयास करने के बावजूद अजय सिंह का पता नहीं चलता है। ऐसे में अधिकारी समन तामील की विकसित विधि का उपयोग करता है। वह अजय सिंह के घर जाता है और वहाँ उनके परिवार में रहने वाले वयस्क पुरुष सदस्य, जैसे उनके भाई या पिता, को समन सौंपता है। यह सुनिश्चित करता है कि समन की सूचना अजय सिंह तक पहुँच सके और विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
4. चस्पा या प्रतिस्थापित तामील:-
जब ऊपर वर्णित तामील के विनिर्दिष्ट प्रकारों से किसी भी प्रकार से समन की तामील नही की जा सकती है। तब समन की एक प्रति को समनित व्यक्ति के घर के सहज द्रश्य भाग पर लागई जयगी। इस प्रकार से की गई तामील चस्पा तामील कहलाती है।(धारा65)
उदाहरण : “विवेक” को न्यायालय द्वारा समन भेजा गया है, लेकिन व्यक्तिगत तामील (धारा 62), निगमित तामील (धारा 63) और विकसित तामील (धारा 64) के सभी प्रयास विफल हो जाते हैं। ऐसे में अधिकारी चस्पा तामील (धारा 65) का उपयोग करता है।
अधिकारी विवेक के निवास स्थान पर जाता है और समन की एक प्रति को उनके घर के सहज दृश्य भाग, जैसे मुख्य द्वार या दीवार, पर चस्पा कर देता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि समन की सूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो, अधिकारी इसकी उचित रिपोर्ट भी तैयार करता है।
इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब समनित व्यक्ति पर समन अन्य तरीकों से पहुँचाना संभव नहीं होता, जिससे विधिक प्रक्रिया बाधित न हो
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सरकारी सेवक पर समन की तामील कैसे होगी?
उदाहरण के “अभिषेक सनों ” एक सरकारी कर्मचारी हैं और उसके लिए न्यायालय द्वारा समन भेजा गया है।
समन को तामील कराने के लिए, इसे अभिषेक सनों के कार्यालय के प्रधान अधिकारी को भेजा जाता है। जैसे ही प्रधान अधिकारी समन प्राप्त करता है, वह इसे व्यक्तिगत रूप से अभिषेक सनों को सौंपता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वह विधिक कार्यवाही के बारे में जानकारी प्राप्त कर सके ।
न्यायालय की अधिकारिता के बाहर समन की तामील
उदाहरण
दिल्ली के एक न्यायालय ने “राघव मेहरा” को समन भेजा है, लेकिन राघव मेहरा मुंबई में रहता है, जो दिल्ली के न्यायालय की क्षेत्र अधिकारिता के बाहर है।
इस स्थिति में, दिल्ली का न्यायालय समन की दो प्रतियाँ मुंबई की अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट को भेजेगा। मुंबई का मजिस्ट्रेट इस समन को ऐसे तामील करवाता है, जैसे मानो उसने स्वयं इसे जारी किया हो। वह तामील की प्रक्रिया का पालन करता है और सुनिश्चित करता है कि समन सही ढंग से राघव मेहरा पर तामील हो और वह दिल्ली न्यायालय के समक्ष विधिक कार्यवाही कोई दस्तावेज पेश करे या हाजिर हो ।


